खामोशी

अक्सर लोगों से सुना है की खामोशी सब कुछ बोल जाती है।लेकिन उस खामोशी को समझ पाना भी बहुत मुश्किल हो जाता है।ऐसी ही कुछ बात थी उसकी खामोशी में भी। बहुत सी बातें जो वो नहीं कह पाता था वो उसकी आंखे बोल जाती थी।लेकिन कुछ तो हुआ था उसे जो वो कुछ कह नहीं रहा था।उसका बोलना मुझे बहुत पसंद था लेकिन उसका एक दम से खामोश हो जाना मुझे समझ नहीं आया।जितना मैं उसे करीब से जानने की कोशिश करती उतना ही कुछ अलग सा ही पाती।मुझे लगता था कि मैं उससे समझने लगी हूं लेकिन शायद मैं गलत थी।समझना तो तब होता है जब आप उस इंसान की खामोशी समझने लगो।लेकिन पता नहीं अचानक उसे क्या हुआ था।मुझे ऐसा अहेसास होने लगा जैसे कि वो मुझसे दूर जा रहा है।इतना खामोश इतना शांत मैने कभी उसे नहीं देखा। मैं चाहती थी कि वो मुझसे बाते करे कोई परेशानी हो तो बताए।लेकिन नहीं उसने तो खामोशी को ही चुना और मैं आज भी उसकी खामोशी को ना समझ पाई।“तेरी रूह में खामोशी है और मेरी आवाज में तन्हाई, तू अपने अंदाज में खामोश है मैं अपने अंदाज में तन्हा”

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