खामोशी

अक्सर लोगों से सुना है की खामोशी सब कुछ बोल जाती है।लेकिन उस खामोशी को समझ पाना भी बहुत मुश्किल हो जाता है।ऐसी ही कुछ बात थी उसकी खामोशी में भी। बहुत सी बातें जो वो नहीं कह पाता था वो उसकी आंखे बोल जाती थी।लेकिन कुछ तो हुआ था उसे जो वो कुछ कह नहीं रहा था।उसका बोलना मुझे बहुत पसंद था लेकिन उसका एक दम से खामोश हो जाना मुझे समझ नहीं आया।जितना मैं उसे करीब से जानने की कोशिश करती उतना ही कुछ अलग सा ही पाती।मुझे लगता था कि मैं उससे समझने लगी हूं लेकिन शायद मैं गलत थी।समझना तो तब होता है जब आप उस इंसान की खामोशी समझने लगो।लेकिन पता नहीं अचानक उसे क्या हुआ था।मुझे ऐसा अहेसास होने लगा जैसे कि वो मुझसे दूर जा रहा है।इतना खामोश इतना शांत मैने कभी उसे नहीं देखा। मैं चाहती थी कि वो मुझसे बाते करे कोई परेशानी हो तो बताए।लेकिन नहीं उसने तो खामोशी को ही चुना और मैं आज भी उसकी खामोशी को ना समझ पाई।“तेरी रूह में खामोशी है और मेरी आवाज में तन्हाई, तू अपने अंदाज में खामोश है मैं अपने अंदाज में तन्हा”

पहली नजर वाला एक तरफा प्यार

कहते हैं ना जब जिसको मिलना होता है तब वो मिल जाता है।ऐसा ही कुछ हुआ तनीषा और अविरल के साथ।तनीषा अपने भाई की शादी में गई थी जब उसने पहली बार अविरल को देखा।देखते ही उसे दिल दे बैठी थी बेचारी।लेकिन इसकी खबर अविरल को दूर दूर तक नहीं थी।अविरल ने भी तनीषा को देख लिया था और अब दोनों की नजरों में बात होना भी शुरू हो गई थी।धीरे धीरे समय बीतता गया और तनीषा को जाना पड़ा ।दोनों को एक दूसरे का नाम तक नहीं पता था इस बात को सोच सोच के तनीषा परेशान हो रही थी।अब जो होता है अच्छे के लिए होता है।तनीषा वाहा से ऐसे ही वापस आ गई।अगले दिन ऐसे ही उसे अचानक सोशल मीडिया साइट्स पे उसकी फोटो मिली जिसपे उसने कॉमेंट किया और उसके बाद उसने उसे रिक्वेस्ट भेज दी।दोनों की रोज बात होने लगी।धीरे धीरे करके दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगने लगा।घंटों दोनों की बाते होना एक दूसरे को चिढाना,परेशान करना और सबसे अच्छी बात ये कि एक दूसरे के मुश्किल समय में साथ देना।एक साल हो गया था उनकी दोस्ती को जब वो पहली बार मिले।एक दूसरे से मिल के उनको बहुत खुशी मिली।उस दिन उन्होंने एक दूसरे के साथ बहुत समय बिताया और मज़े किए।फिर ऐसे ही उनका मिलना शुरू हो गया।हालांकि महीने हो जाते थे उन्हें मिले लेकिन जब मिलते थे तो सारी कसर पूरी कर देते थे।वो दोनो दोस्त से कब बेस्ट फ्रेंड बन गए पता ही नहीं चला।अब सारी बाते एक दूसरे से शेयर करना,एक दूसरे के पसंद से काम करना सब कुछ होने लगा।कही ना कही तनीषा अविरल से प्यार करने लगी थी लेकिन वो इस बात से अनजान थी।उसे तब एहसास हुआ जब उसकी दोस्तों ने उसे बताया।लेकिन फिर भी वो चुप रही उसने अविरल को कुछ नहीं बताया।ऐसे ही करते करते दो साल बीत गए कि अचानक अविरल को तनीषा के बारे में पता चला।अब वो तो उससे प्यार करता नहीं था इसलिए उसने उसे समझाया कि अपने पे ध्यान दो।लेकिन प्यार तो आखिर प्यार होता है ना। भूले भुलाए नहीं भूलता।तनीषा ने उससे सच्चा प्यार किया था तो वो भला कैसे भूल जाती।फिर भी वो उसे पागलों की तरह प्यार करने लगी।ऐसे ही करते करते समय बीतता गया।अचानक पता नहीं अविरल का स्वभाव बदलने लगा।वो तनीषा से दूर होने लगा।ना ठीक से बात करना ना कुछ। यहां तक अब उसने तनीषा को मेसेज और कॉल करना भी बन्द कर दिया है।ये बात अभी तक तनीषा को भी नहीं समझ आईं की अविरल ने ऐसा क्यों किया आखिर?अब आगे क्या अविरल और तनीषा एक होंगे? क्या इसके पीछे का कारण पता चलेगा कहना थोड़ा मुश्किल है।

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